URD 诗篇 章 82

诗篇 82

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1़ुदा की जमा'अत में ख़ुदा मौजूद है। 2“तुम कब तक बेइन्साफ़ी से 'अदालत करोगे, 3ग़रीब और यतीम का इन्साफ़ करो, 4ग़रीब और मोहताज को बचाओ; 5वह न तो कुछ जानते हैं न समझते हैं, 6मैंने कहा था, “तुम इलाह हो, 7तोभी तुम आदमियों की तरह मरोगे, 8ऐ ख़ुदा! उठ ज़मीन की 'अदालत कर

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