URD 诗篇 章 44

诗篇 44

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1 ख़ुदा, हम ने अपने कानों से सुना; 2तूने क़ौमों को अपने हाथ से निकाल दिया, 3क्यूँकि न तो यह अपनी तलवार से इस मुल्क पर क़ाबिज़ हुए, 4ऐ ख़ुदा! तू मेरा बादशाह है; 5तेरी बदौलत हम अपने मुख़ालिफ़ों को गिरा देंगे; 6क्यूँकि न तो मैं अपनी कमान पर भरोसा करूँगा, 7लेकिन तूने हम को हमारे मुख़ालिफ़ों से बचाया है, 8हम दिन भर ख़ुदा पर फ़ख़्र करते रहे हैं, 9लेकिन तूने तो अब हम को छोड़ दिया 10तू हम को मुख़ालिफ़ के आगे पस्पा करता है, 11तूने हम को ज़बह होने वाली भेड़ों की तरह कर दिया, 12तू अपने लोगों को मुफ़्त बेच डालता है, 13तू हम को हमारे पड़ोसियों की मलामत का निशाना, 14तू हम को क़ौमों के बीच एक मिसाल, 15मेरी रुस्वाई दिन भर मेरे सामने रहती है, 16मलामत करने वाले और कुफ़्र बकने वाले की बातों की वजह से, 17यह सब कुछ हम पर बीता तोभी हम तुझ को नहीं भूले, 18न हमारे दिल नाफ़रमान हुए, 19जो तूने हम को गीदड़ों की जगह में खू़ब कुचला, 20अगर हम अपने ख़ुदा के नाम को भूले, 21तो क्या ख़ुदा इसे दरियाफ़्त न कर लेगा? 22बल्कि हम तो दिन भर तेरी ही ख़ातिर जान से मारे जाते हैं, 23ऐ ख़ुदावन्द, जाग! तू क्यूँ सोता है? 24तू अपना मुँह क्यूँ छिपाता है, 25क्यूँकि हमारी जान ख़ाक में मिल गई, 26हमारी मदद के लिए उठ

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