URD 诗篇 章 147

诗篇 147

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1़ुदावन्द की हम्द करो! 2ख़ुदावन्द येरूशलेम को ता'मीर करता है; 3वह शिकस्ता दिलों को शिफ़ा देता है, 4वह सितारों को शुमार करता है, 5हमारा ख़ुदावन्द बुजु़र्ग और कु़दरत में 'अज़ीम है; 6ख़ुदावन्द हलीमों को संभालता है, 7ख़ुदावन्द के सामने शुक्रगुज़ारी का हम्द गाओ, 8जो आसमान को बादलों से मुलब्बस करता है; 9जो हैवानात को ख़ुराक देता है, 10घोड़े के ज़ोर में उसकी खु़शनूदी नहीं न आदमी की टाँगों से उसे कोई ख़ुशी है; 11ख़ुदावन्द उनसे ख़ुश है जो उससे डरते हैं, 12ऐ येरूशलेम! ख़ुदावन्द की सिताइश कर!, 13क्यूँकि उसने तेरे फाटकों के बेंडों को मज़बूत किया है, 14वह तेरी हद में अम्न रखता है! 15वह अपना हुक्म ज़मीन पर भेजता है, 16वह बर्फ़ को ऊन की तरह गिराता है, 17वह यख़ को लुक़मों की तरह फेंकता 18वह अपना कलाम नाज़िल करके उनको पिघला देता है 19वह अपना कलाम या'क़ूब पर ज़ाहिर करता है, 20उसने किसी और क़ौम से ऐसा सुलूक नहीं किया;

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