URD 诗篇 章 22

诗篇 22

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1 मेरे ख़ुदा! ऐ मेरे ख़ुदा! तूने मुझे क्यूँ छोड़ दिया? 2ऐ मेरे ख़ुदा! मै दिन को पुकारता हूँ लेकिन तू जवाब नहीं देता 3लेकिन तू पाक है 4हमारे बाप दादा ने तुझ पर भरोसा किया; 5उन्होंने तुझ से फ़रियाद की और रिहाई पाई; 6लेकिन मै तो कीड़ा हूँ, इंसान नहीं; 7वह सब जो मुझे देखते हैं, मेरा मज़ाक़ उड़ाते हैं; 8“अपने को ख़ुदावन्द के सुपुर्द कर दे वही उसे छुड़ाए, 9लेकिन तु ही मुझे पेट से बहार लाया; 10मैं पैदाइश ही से तुझ पर छोड़ा गया, मेरी माँ के पेट ही से तू मेरा ख़ुदा है। 11मुझ से दूर न रह क्यूँकि मुसीबत क़रीब है, इसलिए कि कोई मददगार नहीं। 12बहुत से साँडों ने मुझे घेर लिया है, बसन के ताक़तवर साँड मुझे घेरे हुए हैं। 13वह फाड़ने और गरजने वाले बबर की तरह मुझ पर अपना मूंह पसारे हुए हैं। 14मैं पानी की तरह बह गया मेरी सब हड्डियाँ उखड़ गईं। 15मेरी ताक़त ठीकरे की तरह ख़ुश्क हो गई, 16क्यूँकि कुत्तो ने मुझे घेर लिया है; 17मैं अपनी सब हड्डियाँ गिन सकता हूँ; 18वह मेरे कपड़े आपस में बाँटते हैं, 19लेकिन तू ऐ ख़ुदावन्द, दूर न रह! 20मेरी जान को तलवार से बचा, 21मुझे बबर के मुँह से बचा, 22मैं अपने भाइयों से तेरे नाम का इज़हार करूँगा; 23ऐ ख़ुदावन्द से डरने वालों, उसकी सिताइश करो! 24क्यूँकि उसने न तो मुसीबत ज़दा की मुसीबत को हक़ीर जाना न उससे नफ़रत की, 25बड़े मजमे' में मेरी सना ख़्वानी का जरिया' तू ही है; 26हलीम खाएँगे और सेर होंगे; 27सारी दुनिया ख़ुदावन्द को याद करेगी 28क्यूँकि सल्तनत ख़ुदावन्द की है, 29दुनिया के सब आसूदा हाल लोग खाएँगे और सिज्दा करेंगे; 30एक नसल उसकी बन्दगी करेगी; 31वह आएँगे और उसकी सदाक़त को एक क़ौम पर जो पैदा होगी

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