URD 诗篇 章 12

诗篇 12

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1 ख़ुदावन्द! बचा ले क्यूँकि कोई दीनदार नहीं रहा 2वह अपने अपने पड़ोसी से झूठ बोलते हैं 3ख़ुदावन्द सब ख़ुशामदी लबों को 4वह कहते हैं, “हम अपनी ज़बान से जीतेंगे, 5ग़रीबों की तबाही और ग़रीबों कीआह की वजह से, 6ख़ुदावन्द का कलाम पाक है, 7तू ही ऐ ख़ुदावन्द उनकी हिफ़ाज़त करेगा, 8जब बनी आदम में पाजीपन की क़द्र होती है,

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