URD 诗篇 章 36

诗篇 36

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1रीर की बदी से मेरे दिल में ख़याल आता है, 2क्यूँकि वह अपने आपको अपनी नज़र में इस ख़याल से तसल्ली देता है, 3उसके मुँह में बदी और फ़रेब की बातें हैं; 4वह अपने बिस्तर पर बदी के मन्सूबे बाँधता है; 5ऐ ख़ुदावन्द, आसमान में तेरी शफ़क़त है, 6तेरी सदाक़त ख़ुदा के पहाड़ों की तरह है, 7ऐ ख़ुदा, तेरी शफ़क़त क्या ही बेशक़ीमत है! 8वह तेरे घर की ने'मतों से ख़ूब आसूदा होंगे, 9क्यूँकि ज़िन्दगी का चश्मा तेरे पास है; 10तेरे पहचानने वालों पर तेरी शफ़क़त हमेशा की हो, 11मग़रूर आदमी मुझ पर लात न उठाने पाए, 12बदकिरदार वहाँ गिरे पड़े हैं;

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