URD 诗篇 章 51

诗篇 51

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1 ख़ुदा! अपनी शफ़क़त के मुताबिक़ मुझ पर रहम कर; 2मेरी बदी को मुझ से धो डाल, 3क्यूँकि मैं अपनी ख़ताओं को मानता हूँ, 4मैंने सिर्फ़ तेरा ही गुनाह किया है, 5देख, मैंने बदी में सूरत पकड़ी, 6देख, तू बातिन की सच्चाई पसंद करता है, 7ज़ूफ़े से मुझे साफ़ कर, तो मैं पाक हूँगा; 8मुझे ख़ुशी और ख़ुर्रमी की ख़बर सुना, 9मेरे गुनाहों की तरफ़ से अपना मुँह फेर ले, 10ऐ ख़ुदा! मेरे अन्दर पाक दिल पैदा कर, 11मुझे अपने सामने से ख़ारिज न कर, 12अपनी नजात की शादमानी मुझे फिर'इनायत कर, 13तब मैं ख़ताकारों को तेरी राहें सिखाऊँगा, 14ऐ ख़ुदा! ऐ मेरे नजात बख़्श ख़ुदा, 15ऐ ख़ुदावन्द! मेरे होंटों को खोल दे, 16क्यूँकि कु़र्बानी में तेरी ख़ुशी नहीं, 17शिकस्ता रूह ख़ुदा की कु़र्बानी है; 18अपने करम से सिय्यून के साथ भलाई कर, 19तब तू सदाक़त की कु़र्बानियों

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