URD 诗篇 章 109

诗篇 109

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1 ख़ुदा मेरे महमूद ख़ामोश न रह! 2क्यूँकि शरीरों और दग़ाबाज़ों ने मेरे ख़िलाफ़ मुँह खोला है, 3उन्होंने 'अदावत की बातों से मुझे घेर लिया, 4वह मेरी मुहब्बत की वजह से मेरे मुख़ालिफ़ हैं, 5उन्होंने नेकी के बदले मुझ से बदी की है, 6तू किसी शरीर आदमी को उस पर मुक़र्रर कर दे 7जब उसकी 'अदालत हो तो वह मुजरिम ठहरे, 8उसकी उम्र कोताह हो जाए, 9उसके बच्चे यतीम हो जाएँ, 10उसके बच्चे आवारा होकर भीक माँगे; 11क़र्ज़ के तलबगार उसका सब कुछ छीन ले, 12कोई न हो जो उस पर शफ़क़त करे, 13उसकी नसल कट जाए, 14उसके बाप — दादा की बदी ख़ुदावन्द के सामने याद रहे, 15वह बराबर ख़ुदावन्द के सामने रहें, 16इसलिए कि उसने रहम करना याद नरख्खा, 17बल्कि ला'नत करना उसे पसंद था, 18उसने ला'नत को अपनी पोशाक की तरह पहना, 19वह उसके लिए उस पोशाक की तरह हो जिसे वह पहनता है, 20ख़ुदावन्द की तरफ़ से मेरे मुख़ालिफ़ों का, 21लेकिन ऐ मालिक ख़ुदावन्द, 22इसलिए कि मैं ग़रीब और मुहताज हूँ, 23मैं ढलते साये की तरह जाता रहा; 24फ़ाक़ा करते करते मेरे घुटने कमज़ोर हो गए, 25मैं उनकी मलामत का निशाना बन गया हूँ 26ऐ ख़ुदावन्द मेरे ख़ुदा, मेरी मदद कर! 27ताकि वह जान लें कि इसमें तेरा हाथ है, 28वह ला'नत करते रहें, लेकिन तू बरकत दे! 29मेरे मुख़ालिफ़ ज़िल्लत से मुलब्बस हो जाएँ 30मैं अपने मुँह से ख़ुदावन्द का बड़ा शुक्र करूँगा, 31क्यूँकि वह मोहताज के दहने हाथ खड़ा होगा,

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