URD 诗篇 章 24

诗篇 24

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1़मीन और उसकी मा'मुरी ख़ुदावन्द ही की है, 2क्यूँकि उसने समन्दरों पर उसकी बुनियाद रख्खी 3ख़ुदावन्द के पहाड़ पर कौन चढ़ेगा? 4वही जिसके हाथ साफ़ हैं और जिसका दिल पाक है, 5वह ख़ुदावन्द की तरफ़ से बरकत पाएगा, 6यही उसके तालिबों की नसल है, 7ऐ फाटको, अपने सिर बुलन्द करो। 8यह जलाल का बादशाह कौन है? 9ऐ फाटको, अपने सिर बुलन्द करो! 10यह जलाल का बादशाह कौन है?

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