URD 诗篇 章 17

诗篇 17

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1 ख़ुदावन्द, हक़ को सुन, मेरी फ़रियाद पर तवज्जुह कर। 2मेरा फ़ैसला तेरे सामने से ज़ाहिर हो! 3तूने मेरे दिल को आज़मा लिया है, तूने रात को मेरी निगरानी की; 4इंसानी कामों में तेरे लबों के कलाम की मदद से 5मेरे कदम तेरे रास्तों पर क़ाईम रहे हैं, 6ऐ ख़ुदा, मैंने तुझ से दुआ की है क्यूँकि तू मुझे जवाब देगा। 7तू जो अपने दहने हाथ से अपने भरोसा करने वालों को उनके मुखालिफ़ों से बचाता है, 8मुझे आँख की पुतली की तरह महफूज़ रख; 9उन शरीरों से जो मुझ पर ज़ुल्म करते हैं, 10उन्होंने अपने दिलों को सख़्त किया है; 11उन्होंने कदम कदम पर हम को घेरा है; 12वह उस बबर की तरह है जो फाड़ने पर लालची हो, 13उठ, ऐ ख़ुदावन्द! उसका सामना कर, 14अपने हाथ से ऐ ख़ुदावन्द! मुझे लोगों से बचा। या'नी दुनिया के लोगों से, 15लेकिन मैं तो सदाक़त में तेरा दीदार हासिल करूँगा;

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