URD 诗篇 章 13

诗篇 13

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1 ख़ुदावन्द, कब तक? क्या तू हमेशा मुझे भूला रहेगा? 2कब तक मैं जी ही जी में मन्सूबा बाँधता रहूँ, 3ऐ ख़ुदावन्द मेरे ख़ुदा, मेरी तरफ़ तवज्जुह कर और मुझे जवाब दे। 4ऐसा न हो कि मेरा दुश्मन कहे, 5लेकिन मैंने तो तेरी रहमत पर भरोसा किया है; 6मैं ख़ुदावन्द का हम्द गाऊँगा

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