URD भजन संहिता अध्याय 95

भजन संहिता 95

1ओ हम ख़ुदावन्द के सामने नग़मासराई करे! 2शुक्रगुज़ारी करते हुए उसके सामने में हाज़िर हों, 3क्यूँकि ख़ुदावन्द ख़ुदा — ए — 'अज़ीम है, 4ज़मीन के गहराव उसके क़ब्ज़े में हैं; 5समन्दर उसका है, उसी ने उसको बनाया, 6आओ हम झुकें और सिज्दा करें, 7क्यूँकि वह हमारा ख़ुदा है, 8तुम अपने दिल को सख़्त न करो जैसा मरीबा में, 9उस वक़्त तुम्हारे बाप — दादा ने मुझे आज़माया, 10चालीस बरस तक मैं उस नसल से बेज़ार रहा, 11चुनाँचे मैने अपने ग़ज़ब में क़सम खाई कि

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