URD भजन संहिता अध्याय 113

भजन संहिता 113

1़ुदावन्द की हम्द करो! ऐ ख़ुदावन्द के बन्दों, 2अब से हमेशा तक, 3आफ़ताब के निकलने' से डूबने तक, 4ख़ुदावन्द सब क़ौमों पर बुलन्द — ओ — बाला है; 5ख़ुदावन्द हमारे ख़ुदा की तरह कौन है? 6जो फ़रोतनी से, 7वह ग़रीब को खाक से, 8ताकि उसे उमरा के साथ, 9वह बाँझ का घर बसाता है, और उसे बच्चों वाली बनाकर दिलखुश करता है।

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