URD भजन संहिता अध्याय 129

भजन संहिता 129

1स्राईल अब यूँ कहे, 2हाँ, उन्होंने मेरी जवानी से अब तक मुझे बार बार सताया, 3हलवाहों ने मेरी पीठ पर हल चलाया, 4ख़ुदावन्द सादिक़ है; 5सिय्यून से नफ़रत रखने वाले, 6वह छत पर की घास की तरह हों, 7जिससे फ़सल काटने वाला अपनी मुट्ठी को, 8न आने जाने वाले यह कहते हैं,

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