URD भजन संहिता अध्याय 146

भजन संहिता 146

1़ुदावन्द की हम्द करो ऐ मेरी जान, 2मैं उम्र भर ख़ुदावन्द की हम्द करूँगा, 3न उमरा पर भरोसा करो न आदमज़ाद पर, 4उसका दम निकल जाता है तो वह मिट्टी में मिल जाता है; 5खु़श नसीब है वह, जिसका मददगार या'क़ूब का ख़ुदा है, 6जिसने आसमान और ज़मीन और समन्दर को, 7जो मज़लूमों का इन्साफ़ करता है; 8ख़ुदावन्द अन्धों की आँखें खोलता है; 9ख़ुदावन्द परदेसियों की हिफ़ाज़त करता है; 10ख़ुदावन्द, हमेशा तक सल्तनत करेगा,

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