URD भजन संहिता अध्याय 4

भजन संहिता 4

1ब मै पुकारूँ तो मुझे जबाब दे ऐ मेरी सदाक़त के ख़ुदा! 2ऐ बनी आदम! कब तक मेरी 'इज़्ज़त के बदले रुस्वाई होगी? 3जान लो कि ख़ुदावन्द ने दीनदार को अपने लिए अलग कर रखा है; 4थरथराओ और गुनाह न करो; 5सदाक़त की कु़र्बानियाँ पेश करो, 6बहुत से कहते हैं कौन हम को कुछ भलाई दिखाएगा? 7तूने मेरे दिल को उससे ज़्यादा खु़शी बख़्शी है, 8मैं सलामती से लेट जाऊँगा और सो रहूँगाः क्यूँकि ऐ ख़ुदावन्द!

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