URD भजन संहिता अध्याय 52

भजन संहिता 52

1 ज़बरदस्त, तू शरारत पर क्यूँ फ़ख़्र करता है? 2तेरी ज़बान महज़ शरारत ईजाद करती है; 3तू बदी को नेकी से ज़्यादा पसंद करता है, 4ऐ दग़ाबाज़ ज़बान! 5ख़ुदा भी तुझे हमेशा के लिए हलाक कर डालेगा; 6सादिक़ भी इस बात को देख कर डर जाएँगे, 7कि देखो, यह वही आदमी है जिसने ख़ुदा को अपनी पनाहगाह न बनाया, 8लेकिन मैं तो ख़ुदा के घर में जैतून के हरे दरख़्त की तरह हूँ। 9मैं हमेशा तेरी शुक्रगुज़ारी करता रहूँगा,

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