URD भजन संहिता अध्याय 111

भजन संहिता 111

1़ुदावन्द की हम्द करो! मैं रास्तबाज़ों की मजलिस में और जमा'अत में, 2ख़ुदावन्द के काम 'अज़ीम हैं, 3उसके काम जलाली और पुर हश्मत हैं, 4उसने अपने 'अजायब की यादगार क़ाईम की है; 5वह उनको जो उससे डरते हैं खू़राक देता है; 6उसने कौमों की मीरास अपने लोगों को देकर, 7उसके हाथों के काम बरहक़ और इन्साफ भरे हैं; 8वह हमेशा से हमेशा तक क़ाईम रहेंगे, 9उसने अपने लोगों के लिए फ़िदिया दिया; 10ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ समझ का शुरू' है;

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