भजन संहिता 140
1याहवेह, दुष्ट पुरुषों से मुझे उद्धार प्रदान कीजिए; 2वे मन ही मन अनर्थ षड़्यंत्र रचते रहते हैं 3उन्होंने अपनी जीभ सर्प सी तीखी बना रखी है; 4याहवेह, दुष्टों से मेरी रक्षा कीजिए; 5उन अहंकारियों ने मेरे पैरों के लिए एक फंदा बनाकर छिपा दिया है; 6मैं याहवेह से कहता हूं, “आप ही मेरे परमेश्वर हैं.” 7याहवेह, मेरे प्रभु, आप ही मेरे उद्धार का बल हैं, 8दुष्टों की अभिलाषा पूर्ण न होने दें, याहवेह; 9जिन्होंने इस समय मुझे घेरा हुआ है; 10उनके ऊपर जलते हुए कोयलों की वृष्टि हो; 11निंदक इस भूमि पर अपने पैर ही न जमा सकें; 12मैं जानता हूं कि याहवेह दुखित का पक्ष अवश्य लेंगे 13निश्चयतः धर्मी आपके नाम का आभार मानेंगे,