भजन संहिता 100
1याहवेह के स्तवन में समस्त पृथ्वी उच्च स्वर में जयघोष करे. 2याहवेह की आराधना आनंदपूर्वक की जाए; 3यह समझ लो कि स्वयं याहवेह ही परमेश्वर हैं. 4धन्यवाद के भाव में उनके द्वारों में 5याहवेह भले हैं; उनकी करुणा सदा की है;
1याहवेह के स्तवन में समस्त पृथ्वी उच्च स्वर में जयघोष करे. 2याहवेह की आराधना आनंदपूर्वक की जाए; 3यह समझ लो कि स्वयं याहवेह ही परमेश्वर हैं. 4धन्यवाद के भाव में उनके द्वारों में 5याहवेह भले हैं; उनकी करुणा सदा की है;