HIN 诗篇 章 7

诗篇 7

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1े मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं तुझ में शरण लेता हूँ; 2ऐसा न हो कि वे मुझ को सिंह के समान 3हे मेरे परमेश्वर यहोवा, यदि मैंने यह किया हो, 4यदि मैंने अपने मेल रखनेवालों से भलाई के बदले बुराई की हो, 5तो शत्रु मेरे प्राण का पीछा करके मुझे आ पकड़े, 7:5 तो शत्रु मेरे प्राण का पीछा करके मुझे आ पकड़े: यदि उस पर लगाए गए दोष सही है, और वह अपराधी ठहरा तो वह दण्ड के लिए तैयार है। (सेला) 6हे यहोवा अपने क्रोध में उठ; 7देश-देश के लोग तेरे चारों ओर इकट्ठे हुए है; 8यहोवा जाति-जाति का न्याय करता है; 9भला हो कि दुष्टों की बुराई का अन्त हो जाए, परन्तु धर्मी को तू स्थिर कर; 10मेरी ढाल परमेश्वर के हाथ में है, 11परमेश्वर धर्मी और न्यायी है, 7:11 परमेश्वर धर्मी और न्यायी है: जैसे वह एक न्यायपूर्ण निर्णय सुनाता है, वह उनके चरित्र की पुष्टि करता है। 12यदि मनुष्य मन न फिराए तो वह अपनी तलवार पर सान चढ़ाएगा; (लूका 13:3-5) 13और उस मनुष्य के लिये उसने मृत्यु के हथियार तैयार कर लिए हैं: 7:13 उसने मृत्यु के हथियार तैयार कर लिए हैं: उन्हें मृत्यु देने के साधन अर्थात् उन्हें दण्डित करेगा। 14देख दुष्ट को अनर्थ काम की पीड़ाएँ हो रही हैं, 15उसने गड्ढे खोदकर उसे गहरा किया, 16उसका उत्पात पलटकर उसी के सिर पर पड़ेगा; 17मैं यहोवा के धर्म के अनुसार उसका धन्यवाद करूँगा,

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