HIN 诗篇 章 113

诗篇 113

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1होवा की स्तुति करो! 2यहोवा का नाम 3उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक, 4यहोवा सारी जातियों के ऊपर महान है, 5हमारे परमेश्वर यहोवा के तुल्य कौन है? 6और आकाश और पृथ्वी पर, 7वह कंगाल को मिट्टी पर से, और दरिद्र को घूरे पर से उठाकर ऊँचा करता है, 113:7 वह कंगाल को मिट्टी पर से, .... उठाकर ऊँचा करता है: जीवन की तुच्छ अवस्था से वह उन्हें धन-सम्पदा और पद-प्रतिष्ठा में ले आता है। 8कि उसको प्रधानों के संग, (अय्यू. 36:7) 9वह बाँझ को घर में बाल-बच्चों की आनन्द करनेवाली माता बनाता है।

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