HCV 诗篇 章 90

诗篇 90

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1्रभु, समस्त पीढ़ियों में 2इसके पूर्व कि पर्वत अस्तित्व में आते 3आप मनुष्य को यह कहकर पुनः धूल में लौटा देते हैं, 4आपके लिए एक हजार वर्ष वैसे ही होते हैं, 5आप मनुष्यों को ऐसे समेट ले जाते हैं, जैसे बाढ़; वे स्वप्न मात्र होते हैं— 6जो प्रातःकाल फूलती है, उसमें बढ़ती है, 7आपका कोप हमें मिटा डालता है, 8हमारे अपराध आपके सामने खुले हैं, 9हमारे जीवन के दिन आपके क्रोध की छाया में ही व्यतीत होते हैं; 10हमारी जीवन अवधि सत्तर वर्ष है—संभवतः 11आपके कोप की शक्ति की जानकारी कौन ले सका है! 12हमें जीवन की न्यूनता की धर्ममय विवेचना करने की अंतर्दृष्टि प्रदान कीजिए, 13याहवेह! मृदु हो जाइए, और कितना विलंब? 14प्रातःकाल में ही हमें अपने करुणा-प्रेम से संतुष्ट कर दीजिए, 90:14 करुणा-प्रेम मूल में ख़ेसेद इस हिब्री शब्द के अर्थ में अनुग्रह, दया, प्रेम, करुणा ये सब शामिल हैं 15हमारे उतने ही दिनों को आनंद से तृप्‍त कर दीजिए, जितने दिन आपने हमें ताड़ना दी थी, 16आपके सेवकों के सामने आपके महाकार्य स्पष्ट हो जाएं 17हम पर प्रभु, हमारे परमेश्वर की मनोहरता स्थिर रहे;

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