HCV 诗篇 章 51

诗篇 51

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1रमेश्वर, अपने करुणा-प्रेम में, 51:1 करुणा-प्रेम मूल में ख़ेसेद इस हिब्री शब्द के अर्थ में अनुग्रह, दया, प्रेम, करुणा ये सब शामिल हैं 2मेरे समस्त अधर्म को धो दीजिए 3मैंने अपने अपराध पहचान लिए हैं, 4वस्तुतः मैंने आपके, मात्र आपके विरुद्ध ही पाप किया है, 5इसमें भी संदेह नहीं कि मैं जन्म के समय से ही पापी हूं, 6यह भी बातें हैं कि आपकी यह अभिलाषा है, कि हमारी आत्मा में सत्य हो; 7जूफ़ा पौधे की टहनी से मुझे स्वच्छ करें, तो मैं शुद्ध हो जाऊंगा; 8मुझमें हर्षोल्लास एवं आनंद का संचार कीजिए; 9मेरे पापों को अपनी दृष्टि से दूर कर दीजिए 10परमेश्वर, मुझमें एक शुद्ध हृदय को उत्पन्‍न कीजिए, 11मुझे अपने सान्‍निध्य से दूर न कीजिए 12अपने उद्धार का उल्लास मुझमें पुनः संचारित कीजिए, 13तब मैं अपराधियों को आपकी नीतियों की शिक्षा दे सकूंगा, 14परमेश्वर, मेरे छुड़ानेवाले परमेश्वर, 15प्रभु, मेरे होंठों को खोल दीजिए, 16आपकी प्रसन्‍नता बलियों में नहीं है, अन्यथा मैं बलि अर्पित करता, 17टूटी आत्मा ही परमेश्वर को स्वीकार्य योग्य बलि है; 18आपकी कृपादृष्टि से ज़ियोन की समृद्धि हो, 19तब धर्मी की अग्निबलि

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