诗篇 79
1परमेश्वर, जनताओं ने आपके निज भाग में अतिक्रमण किया है; 2उन्होंने आपके सेवकों के शव 3येरूशलेम के चारों ओर 4हमारे पड़ोसियों के लिए हम तिरस्कार के पात्र हो गए हैं. 5याहवेह, कब तक? क्या हम पर आपका क्रोध लगातार रहेगा? 6अब तो उन जनताओं पर अपना क्रोध उंडेल दीजिए, 7उन्होंने याकोब को निगल लिया है 8हमारे पूर्वजों के पापों का दंड हमें न दीजिए; 9परमेश्वर, हमारे छुड़ानेवाले, 10भला जनताओं को यह कहने का अवसर क्यों दिया जाए, 11बंदियों का कराहना आप तक पहुंचे; 12प्रभु, पड़ोसी राष्ट्रों ने जो आपकी निंदा की है, 13तब, हम आपकी प्रजा, आपके चरागाह की भेड़ें,