诗篇 69
1परमेश्वर, मेरी रक्षा कीजिए, 2मैं गहरे दलदल में डूब जा रहा हूं, 3सहायता के लिए पुकारते-पुकारते मैं थक चुका हूं; 4जो अकारण ही मुझसे बैर करते हैं 5परमेश्वर, आप मेरी मूर्खतापूर्ण त्रुटियों से परिचित हैं; 6मेरी प्रार्थना है कि मेरे कारण 7मैं यह लज्जा आपके निमित्त सह रहा हूं, 8मैं अपने परिवार के लिए अपरिचित हो चुका हूं; 9आपके भवन की धुन में जलते जलते मैं भस्म हुआ, 10जब मैंने उपवास करते हुए विलाप किया, 11जब मैंने शोक-वस्त्र धारण किए, 12नगर द्वार पर बैठे हुए पुरुष मुझ पर ताना मारते हैं, 13किंतु याहवेह, आपसे मेरी गिड़गिड़ाहट है, के कारण, 69:13 करुणा-प्रेम मूल में ख़ेसेद इस हिब्री शब्द के अर्थ में अनुग्रह, दया, प्रेम, करुणा ये सब शामिल हैं 14मुझे इस दलदल से बचा लीजिए, 15बाढ़ का जल मुझे समेट न ले 16याहवेह, अपने करुणा-प्रेम की भलाई के कारण मुझे प्रत्युत्तर दीजिए; 17अपने सेवक से मुंह न मोड़िए; 18पास आकर मुझे इस स्थिति से बचा लीजिए; 19आपको सब कुछ ज्ञात है, किस प्रकार मुझसे घृणा की जा रही है, मुझे लज्जित एवं अपमानित किया जा रहा है; 20निंदा ने मेरा हृदय तोड़ दिया है 21उन्होंने मेरे भोजन में विष मिला दिया, 22उनके लिए सजाई गई मेज़ ही उनके लिए फंदा बन जाए; 23उनके आंखों की ज्योति जाती रहे और वे देख न सकें, 24अपना क्रोध उन पर उंडेल दीजिए; 25उनकी छावनी निर्जन हो जाए; 26ये उन्हें दुःखित करते हैं, जिन्हें आपने घायल किया था, 27उनके समस्त पापों के लिए उन्हें दोषी घोषित कीजिए; 28उनके नाम जीवन-पुस्तक से मिटा दिए जाएं; 29मैं पीड़ा और संकट में पड़ा हुआ हूं, 30मैं परमेश्वर की महिमा गीत के द्वारा करूंगा, 31इससे याहवेह बछड़े के बलि अर्पण से अधिक प्रसन्न होंगे; 32दरिद्रों के लिए यह हर्ष का विषय होगा. 33याहवेह असहायों की सुनते हैं, 34आकाश और पृथ्वी उनकी वंदना करें, हां, 35क्योंकि परमेश्वर ज़ियोन की रक्षा करेंगे; 36यह भूमि प्रभु के सेवकों की संतान का भाग हो जाएगी,