URD Mezmurlar Bölüm 85

Mezmurlar 85

URD · Karşılaştır · Ses

1 ख़ुदावन्द तू अपने मुल्क पर मेहरबान रहा है। 2तूने अपने लोगों की बदकारी मु'आफ़ कर दी है; 3तूने अपना ग़ज़ब बिल्कुल उठा लिया; 4ऐ हमारे नजात देने वाले ख़ुदा! 5क्या तू हमेशा हम से नाराज़ रहेगा? 6क्या तू हम को फिर ज़िन्दा न करेगा, 7ऐ ख़ुदावन्द! तू अपनी शफ़क़त हमको दिखा, 8मैं सुनूँगा कि ख़ुदावन्द ख़ुदा क्या फ़रमाता है। 9यक़ीनन उसकी नजात उससे डरने वालों के क़रीब है, 10शफ़क़त और रास्ती एक साथ मिल गई हैं, 11रास्ती ज़मीन से निकलती है, 12जो कुछ अच्छा है वही ख़ुदावन्द अता फ़रमाएगा 13सदाक़त उसके आगे — आगे चलेगी,

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