Mezmurlar 2
1क़ौमें किस लिए ग़ुस्से में है 2ख़ुदावन्द और उसके मसीह के ख़िलाफ़ ज़मीन के बादशाह एक हो कर, 3“आओ, हम उनके बन्धन तोड़ डालें, 4वह जो आसमान पर तख़्त नशीन है हँसेगा, 5तब वह अपने ग़ज़ब में उनसे कलाम करेगा, 6“मैं तो अपने बादशाह को, 7मैं उस फ़रमान को बयान करूँगा:ख़ुदावन्द ने मुझ से कहा, 8मुझ से माँग, और मैं क़ौमों को तेरी मीरास के लिए, 9तू उनको लोहे के 'असा से तोड़ेगा, 10इसलिए अब ऐ बादशाहो, 11डरते हुए ख़ुदावन्द की इबादत करो, 12बेटे को चूमो, ऐसा न हो कि वह क़हर में आए,