Mezmurlar 1
1मुबारक है वह आदमी जो शरीरों की सलाह पर नहीं चलता, 2बल्कि ख़ुदावन्द की शरी'अत में ही उसकी ख़ुशी है; 3वह उस दरख़्त की तरह होगा, जो पानी की नदियों के पास लगाया गया है। 4शरीर ऐसे नहीं, बल्कि वह भूसे की तरह हैं, 5इसलिए शरीर 'अदालत में क़ाईम न रहेंगे, 6क्यूँकि ख़ुदावन्द सादिक़ो की राह जानता है