Mezmurlar 128
1मुबारक है हर एक जो ख़ुदावन्द से डरता, 2तू अपने हाथों की कमाई खाएगा; 3तेरी बीवी तेरे घर के अन्दर मेवादार ताक की तरह होगी, 4देखो! ऐसी बरकत उसी आदमी को मिलेगी, 5ख़ुदावन्द सिय्यून में से तुझ को बरकत दे, 6बल्कि तू अपने बच्चों के बच्चे देखे।