HIN Psalm Sura 65

Psalm 65

HIN · Linganisha · Sauti

1े परमेश्वर, सिय्योन में स्तुति तेरी बाट जोहती है; तेरे लिये मन्नतें पूरी की जाएँगी। 65:1 तेरे लिये मन्नतें पूरी की जाएँगी: परमेश्वर के प्रगट न्याय तथा उसकी भलाई के प्रमाणों को देखकर मनुष्य ने जो शपथ खाई या प्रतिज्ञाएँ की है, यह उनके संदर्भ में है। 2हे प्रार्थना के सुननेवाले! (प्रेरि. 10:34,35, यशा. 66:23) 3अधर्म के काम मुझ पर प्रबल हुए हैं; 4क्या ही धन्य है वह, जिसको तू चुनकर अपने समीप आने देता है, 5हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, 6तू जो पराक्रम का फेंटा कसे हुए, 7तू जो समुद्र का महाशब्द, उसकी तरंगों का महाशब्द, और देश-देश के लोगों का कोलाहल शान्त करता है; 65:7 तू जो समुद्र का महाशब्द, .... शान्त करता है: जब समुद्र तूफानी लहरें उठाता है तब परमेश्वर उसे शान्त करता है। वह विशाल लहरों को शान्त कर देता है।(मत्ती 8:26, यशा. 17:12,13) 8इसलिए दूर-दूर देशों के रहनेवाले तेरे चिन्ह देखकर डर गए हैं; 9तू भूमि की सुधि लेकर उसको सींचता है, 10तू रेघारियों को भली भाँति सींचता है, 11तेरी भलाइयों से, तू वर्ष को मुकुट पहनता है; 12वे जंगल की चराइयों में हरियाली फूट पड़ती हैं; 13चराइयाँ भेड़-बकरियों से भरी हुई हैं;

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