HIN Psalm Sura 13

Psalm 13

HIN · Linganisha · Sauti

1े परमेश्वर, तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? 2मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियाँ करता रहूँ, दिन भर अपने हृदय में दुःखित रहा करूँ?, 13:2 दिन भर अपने हृदय में दुःखित रहा करूँ: प्रतिदिन लगातार दु:खी रहूँ। अर्थात् उसके कष्टों में अन्तराल नहीं था। 3हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आँखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी; 13:3 मेरी आँखों में ज्योति आने दे: मृत्यु के निकट आने पर आँखों की ज्योति कम हो जाती है और उसे ऐसा प्रतीत होता है कि मृत्यु निकट है। वह कहता है कि जब तक परमेश्वर हस्तक्षेप न करे अंधकार गहरा होता जाएगा। 4ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, “मैं उस पर प्रबल हो गया;” 5परन्तु मैंने तो तेरी करुणा पर भरोसा रखा है; 6मैं यहोवा के नाम का भजन गाऊँगा,

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