HIN Psalm Sura 146

Psalm 146

HIN · Linganisha · Sauti

1होवा की स्तुति करो। 2मैं जीवन भर यहोवा की स्तुति करता रहूँगा; 3तुम प्रधानों पर भरोसा न रखना, 4उसका भी प्राण निकलेगा, वह भी मिट्टी में मिल जाएगा; उसकी सब कल्पनाएँ नाश हो जाएँगी। 146:4 उसकी सब कल्पनाएँ नाश हो जाएँगी: उसके उद्देश्य उसकी योजनाएँ, उसकी युक्तियाँ, विजय और आकांक्षाओं के उद्देश्य, धनवान एवं बड़ा बनने की उसकी योजनाएँ। 5क्या ही धन्य वह है, 6वह आकाश और पृथ्वी और समुद्र (प्रेरि. 4:24, प्रेरि. 14:15, प्रेरि. 17:24, प्रका. 10:6, प्रका. 14:7) 7वह पिसे हुओं का न्याय चुकाता है; 8यहोवा अंधों को आँखें देता है। 9यहोवा परदेशियों की रक्षा करता है; अनाथों और विधवा को तो सम्भालता है; 146:9 अनाथों और विधवा को तो सम्भालता है: अर्थात् परमेश्वर उन सब का मित्र है जिनका इस पृथ्वी पर कोई रक्षक नहीं है। 10हे सिय्योन, यहोवा सदा के लिये,

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