यशायाह 34
1हे राज्य, 2क्योंकि याहवेह का क्रोध सब जातियों पर 3जो मर गये हैं उन्हें बाहर फेंक दिया जाएगा, 4आकाश के सभी तारे छिप जाएंगे 5क्योंकि स्वर्ग में मेरी तलवार पीकर तृप्त हो चुकी है; 6याहवेह की तलवार लहू से भरी है, 7जंगली बैलों का भी उन्हीं के साथ संहार हो जाएगा, 8क्योंकि याहवेह द्वारा बदला लेने का दिन तय किया गया है, 9एदोम की नदियां झरने बन जायेंगी, 10न तो यह दिन में बुझेगी, न रात्रि में; 11हवासिल तथा साही इस पर अपना अधिकार कर लेंगे; 12वहां ऐसा कोई भी नहीं जिसे वे राजा घोषित करें, वहां के ऊंचे पद वाले 13गढ़नगर के महलों पर कंटीली झाड़ियां उग जाएंगी, 14वहां मरुभूमि के प्राणियों, 15वहां उल्लू अपना घोंसला बनाएगा तथा वहीं वह अंडे देगा, 16याहवेह की पुस्तक से खोज करते हुए पढ़ो: 17याहवेह ने उनके लिए पासे फेंके हैं;