यशायाह 29
1हाय तुम पर, अरीएल, अरीएल, 2मैं तुम पर विपत्ति लाऊंगा; समान होगा. 29:2 अरीएल अर्थात् अग्निकुण्ड 3मैं तुम्हारे चारों ओर दीवार लगाऊंगा, 4तब तुम्हारा पतन पूरा हो जाएगा; 5किंतु तुम्हारे शत्रुओं का बड़ा झुंड धूल के छोटे कण के समान 6सेनाओं के याहवेह की ओर से बादल गर्जन, 7पूरे देश जिसने अरीएल से लड़ाई की यद्यपि वे सभी, 8यह ऐसा होगा जैसे एक भूखा व्यक्ति स्वप्न देखता है कि वह भोजन कर रहा है, 9रुक जाओ और इंतजार करो, 10क्योंकि याहवेह ने तुम्हारे ऊपर एक भारी नींद की आत्मा को डाला है: 11मैं तुम्हें बता रहा हूं कि ये बातें घटेंगी. किंतु तुम मुझे नहीं समझ रहे. मेरे शब्द उस पुस्तक के समान है, जो बंद हैं और जिस पर एक मुहर लगी है. तुम उस पुस्तक को एक ऐसे व्यक्ति को दो जो पढ़ सकता हो, तो वह व्यक्ति कहेगा, “मैं पुस्तक को पढ़ नहीं सकता क्योंकि इस पर एक मुहर लगी है, और मैं इसे खोल नहीं सकता.” 12अथवा तुम उस पुस्तक को किसी भी ऐसे व्यक्ति को दो, जो पढ़ नहीं सकता, और उस व्यक्ति से कहो कि वह उस पुस्तक को पढ़ें. तब वह व्यक्ति कहेगा, “मैं इस किताब को नहीं पढ़ सकता, क्योंकि मैं अनपढ़ हूं!” 13तब प्रभु ने कहा: 14इसलिये, मैं फिर से इन लोगों के बीच अद्भुत काम करूंगा 15हाय है उन पर जो याहवेह से 16तुम सब बातों को उलटा-पुलटा कर देते हो, 17क्या कुछ ही समय में लबानोन को फलदायी भूमि में नहीं बदला जा सकता 18उस दिन बहरे उस पुस्तक की बात को सुनेंगे, 19नम्र लोगों की खुशी याहवेह में बढ़ती चली जाएगी; 20क्योंकि दुष्ट और ठट्ठा 21वे व्यक्ति जो शब्दों में फंसाते हैं, 22इसलिये याहवेह, अब्राहाम का छूडाने वाला, याकोब को कहते हैं: 23जब याकोब की संतान परमेश्वर के काम को देखेंगे, 24उस समय मूर्ख बुद्धि पायेंगे और जो कुड़कुड़ाते हैं;