यशायाह 11
1यिशै के जड़ से एक कोंपल निकलेगी; 2याहवेह का आत्मा, 3उनकी खुशी याहवेह के प्रति ज्यादा होगी. 4वे तो कंगालों का न्याय धर्म से, 5धर्म उनका कटिबंध 6भेड़िया मेमने के साथ रहेगा, 7गाय और रीछ मिलकर चरेंगे, 8दूध पीता शिशु नाग के बिल से खेलेगा, 9मेरे पूरे पवित्र पर्वत पर 10उस दिन यिशै का मूल जो देशों के लिए झंडा समान प्रतिष्ठित होंगे और देश उनके विषय में पूछताछ करेंगे, तथा उनका विश्राम स्थान भव्य होगा. 11उस दिन प्रभु उस बचे हुओं को लाने के लिए अपना हाथ बढ़ाएंगे, जिसे उन्होंने अश्शूर, मिस्र, पथरोस, कूश, एलाम, शीनार, हामाथ और समुद्री द्वीपों से मोल लिया है. 12वे देशों के लिए एक झंडा खड़ा करेंगे 13तब एफ्राईम की नफरत खत्म हो जाएगी, 14वे पश्चिम दिशा में फिलिस्तीनियों पर टूट पड़ेंगे; 15याहवेह मिस्र के समुद्र की खाड़ी को 16उनके बचे हुए लोगों के लिए