Psaumes 83
1ऐ ख़ुदा! ख़ामोश न रह; ऐ ख़ुदा! 2क्यूँकि देख तेरे दुश्मन ऊधम मचाते हैं 3क्यूँकि वह तेरे लोगों के ख़िलाफ़ मक्कारी से मन्सूबा बाँधते हैं, 4उन्होंने कहा, “आओ, हम इनको काट डालें कि उनकी क़ौम ही न रहे; 5क्यूँकि उन्होंने एक हो कर के आपस में मश्वरा किया है, 6या'नी अदोम के अहल — ए — ख़ैमा 7जबल और'अम्मून और 'अमालीक़, 8असूर भी इनसे मिला हुआ है; 9तू उनसे ऐसा कर जैसा मिदियान से, 10जो 'ऐन दोर में हलाक हुए, 11उनके सरदारों को 'ओरेब और ज़ईब की तरह, 12जिन्होंने कहा है, 13ऐ मेरे ख़ुदा, उनको बगोले की गर्द की तरह बना दे, 14उस आग की तरह जो जंगल को जला देती है, 15तू इसी तरह अपनी आँधी से उनका पीछा कर, 16ऐ ख़ुदावन्द! उनके चेहरों पर रुस्वाई तारी कर, 17वह हमेशा शर्मिन्दा और परेशान रहें, 18ताकि वह जान लें कि तू ही जिसका यहोवा है,