Psaumes 103
1ऐ मेरी जान! ख़ुदावन्द को मुबारक़ कह; 2ऐ मेरी जान! ख़ुदावन्द को मुबारक़ कह 3वह तेरी सारी बदकारी को बख़्शता है 4वह तेरी जान हलाकत से बचाता है, 5वह तुझे उम्र भर अच्छी अच्छी चीज़ों से आसूदा करता है, 6ख़ुदावन्द सब मज़लूमों के लिए सदाक़त 7उसने अपनी राहें मूसा पर 8ख़ुदावन्द रहीम व करीम है, 9वह सदा झिड़कता न रहेगा 10उस ने हमारे गुनाहों के मुवाफ़िक़ हम से सुलूक नहीं किया 11क्यूँकि जिस क़द्र आसमान ज़मीन से बुलन्द, 12जैसे पूरब पच्छिम से दूर है, 13जैसे बाप अपने बेटों पर तरस खाता है, 14क्यूँकि वह हमारी सरिश्त से वाक़िफ़ है, 15इंसान की उम्र तो घास की तरह है, 16कि हवा उस पर चली और वह नहीं, 17लेकिन ख़ुदावन्द की शफ़क़त उससे डरने वालों पर अज़ल से हमेशा तक, 18या'नी उन पर जो उसके 'अहद पर क़ाईम रहते हैं, 19ख़ुदावन्द ने अपना तख़्त आसमान पर क़ाईम किया है, 20ऐ ख़ुदावन्द के फ़िरिश्तो, उसको मुबारक कहो, 21ऐ ख़ुदावन्द के लश्करो, सब उसको मुबारक कहो! 22ऐ ख़ुदावन्द की मख़लूक़ात, सब उसको मुबारक कहो!