Psaumes 27
1ख़ुदावन्द मेरी रोशनी और मेरी नजात मुझे किसकी दहशत? 2जब शरीर या'नी मेरे मुख़ालिफ़ और मेरे दुश्मन, 3चाहे मेरे ख़िलाफ़ लश्कर ख़ेमाज़न हो, 4मैंने ख़ुदावन्द से एक दरख़्वास्त की है, 5क्यूँकि मुसीबत के दिन वह मुझे अपने शामियाने में पोशीदा रख्खेगा; 6अब मैं अपने चारों तरफ़ के दुश्मनों पर सरफराज़ किया जाऊँगा; 7ऐ ख़ुदावन्द, मेरी आवाज़ सुन! मैं पुकारता हूँ। 8जब तूने फ़रमाया, कि मेरे दीदार के तालिब हो; 9मुझ से चेहरा न छिपा। 10जब मेरा बाप और मेरी माँ मुझे छोड़ दें, 11ऐ ख़ुदावन्द, मुझे अपनी राह बता, 12मुझे मेरे मुख़ालिफ़ों की मर्ज़ी पर न छोड़, 13अगर मुझे यक़ीन न होता कि ज़िन्दों की 14ख़ुदावन्द की उम्मीद रख;