URD สุภาษิต บท 28

สุภาษิต 28

1गरचे कोई शरीर का पीछा न करे तोभी वह भागता है, 2मुल्क की ख़ताकारी की वजह से हाकिम बहुत से हैं, 3ग़रीब पर ज़ुल्म करने वाला कंगाल, 4शरी'अत को छोड़ने वाले, 5शरीर 'अद्ल से आगाह नहीं, 6रास्तरौ ग़रीब, 7ता'लीम पर 'अमल करने वाला 'अक़्लमंद बेटा है, 8जो नाजाइज़ सूद और नफ़े' से अपनी दौलत बढ़ाता है, 9जो कान फेर लेता है कि शरी'अत को न सुने, 10जो कोई सादिक़ को गुमराह करता है, 11मालदार अपनी नज़र में 'अक़्लमंद है, 12जब सादिक़ फ़तहयाब होते हैं, तो बड़ी धूमधाम होती है; 13जो अपने गुनाहों को छिपाता है, कामयाब न होगा; 14मुबारक है वह आदमी जो सदा डरता रहता है, 15गरीबों पर शरीर हाकिम, 16बे'अक़्ल हाकिम भी बड़ा ज़ालिम है, 17जिसके सिर पर किसी का खू़न है, 18जो रास्तरौ है रिहाई पाएगा, 19जो अपनी ज़मीन में काश्तकारी करता है, रोटी से सेर होगा, 20दियानतदार आदमी बरकतों से मा'मूर होगा, 21तरफ़दारी करना अच्छा नहीं; 22तंग चश्म दौलत जमा' करने में जल्दी करता है, 23आदमी को सरज़निश करनेवाला आखिरकार, 24जो कोई अपने वालिदैन को लूटता हैऔर कहता है, 25जिसके दिल में लालच है वह झगड़ा खड़ा करता है, 26जो अपने ही दिल पर भरोसा रखता है, बेवक़ूफ़ है; 27जो ग़रीबों को देता है, मुहताज न होगा; 28जब शरीर खड़े होते हैं, तो आदमी ढूँडे नहीं मिलते,

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