URD สุภาษิต บท 17

สุภาษิต 17

1लामती के साथ ख़ुश्क निवाला इस से बेहतर है, 2'अक्लमन्द नौकर उस बेटे पर जी रुस्वा करता है हुक्मरान होगा, 3चाँदी के लिए कुठाली है और सोने केलिए भट्टी, 4बदकिरदार झूटे लबों की सुनता है, 5गरीब पर हँसने वाला, उसके ख़ालिक की बेक़द्री करता है; 6बेटों के बेटे बूढ़ों के लिए ताज हैं; 7ख़ुश गोई बेवक़ूफ़ को नहीं सजती, 8रिश्वत जिसके हाथ में है उसकी नज़रमें गिरान बहा जवाहर है, 9जो ख़ता पोशी करता है मुहब्बत का तालिब है, 10समझदार पर एक झिड़की, 11शरीर महज़ सरकशी का तालिब है, 12जिस रीछनी के बच्चे पकड़े गए हों आदमी का उस से दो चार होना, 13जो नेकी के बदले में बदी करता है, उसके घर से बदी हरगिज़ जुदा न होगी। 14झगड़े का शुरू' पानी के फूट निकलने की तरह है, 15जो शरीर को सादिक़ और जो सादिक़ को शरीर ठहराता है, 16हिकमत ख़रीदने को बेवक़ूफ़ के हाथ में क़ीमत से क्या फ़ाइदा है, 17दोस्त हर वक़्त मुहब्बत दिखाता है, 18बे'अक़्ल आदमी हाथ पर हाथ मारता है, 19फ़साद पसंद ख़ता पसंद है, 20कजदिला भलाई को न देखेगा, 21बेवकूफ़ के वालिद के लिए ग़म है, 22शादमान दिल शिफ़ा बख़्शता है, 23शरीर बगल में रिश्वत रख लेता है, 24हिकमत समझदार के आमने सामने है, 25बेवक़ूफ़ बेटा अपने बाप के लिए ग़म, 26सादिक़ को सज़ा देना, 27साहिब — ए — इल्म कमगो है, 28बेवक़ूफ़ भी जब तक ख़ामोश है, 'अक्लमन्द गिना जाता है;

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