Псалми 41
1मुबारक, है वह जो ग़रीब का ख़याल रखता है 2ख़ुदावन्द उसे महफू़ज़ और ज़िन्दा रख्खेगा, 3ख़ुदावन्द उसे बीमारी के बिस्तर पर संभालेगा; 4मैंने कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, मुझ पर रहम कर! 5मेरे दुश्मन यह कहकर मेरी बुराई करते हैं, 6जब वह मुझ से मिलने को आता है, 7मुझ से 'अदावत रखने वाले सब मिलकर मेरी ग़ीबत करते हैं; 8वह कहते हैं, “इसे तो बुरा रोग लग गया है; 9बल्कि मेरे दिली दोस्त ने जिस पर मुझे भरोसा था, 10लेकिन तू ऐ ख़ुदावन्द! 11इससे मैं जान गया कि तू मुझ से ख़ुश है, 12मुझे तो तू ही मेरी रास्ती में क़याम बख्शता है 13ख़ुदावन्द इस्राईल का ख़ुदा,