Псалтирь 13
1ऐ ख़ुदावन्द, कब तक? क्या तू हमेशा मुझे भूला रहेगा? 2कब तक मैं जी ही जी में मन्सूबा बाँधता रहूँ, 3ऐ ख़ुदावन्द मेरे ख़ुदा, मेरी तरफ़ तवज्जुह कर और मुझे जवाब दे। 4ऐसा न हो कि मेरा दुश्मन कहे, 5लेकिन मैंने तो तेरी रहमत पर भरोसा किया है; 6मैं ख़ुदावन्द का हम्द गाऊँगा