Псалтирь 122
1मैं ख़ुश हुआ जब वह मुझ से कहने लगे 2ऐ येरूशलेम! हमारे क़दम, 3ऐ येरूशलेम तू ऐसे शहर के तरह है जो गुनजान बना हो। 4जहाँ क़बीले या'नी ख़ुदावन्द के क़बीले, 5क्यूँकि वहाँ 'अदालत के तख़्त, 6येरूशलेम की सलामती की दुआ करो, 7तेरी फ़सील के अन्दर सलामती, 8मैं अपने भाइयों और दोस्तों की ख़ातिर, 9ख़ुदावन्द अपने ख़ुदा के घर की ख़ातिर,