Mazmur 81
1परमेश्वर जो हमारा बल है, उसका गीत आनन्द से गाओ; (भज. 67:4) 2गीत गाओ, डफ और मधुर बजनेवाली वीणा और सारंगी को ले आओ। 3नये चाँद के दिन, 4क्योंकि यह इस्राएल के लिये विधि, 5इसको उसने यूसुफ में चितौनी की रीति पर उस समय चलाया, 6“मैंने उनके कंधों पर से बोझ को उतार दिया; 7तूने संकट में पड़कर पुकारा, तब मैंने तुझे छुड़ाया; मरीबा नामक सोते के पास तेरी परीक्षा की। 81:7 मरीबा नामक सोते के पास: यह सोता पर्वत होरेब पर था: (निर्ग. 17:5-7) चट्टान से पानी निकालना इस बात का प्रमाण था कि वह परमेश्वर है। (सेला) 8हे मेरी प्रजा, सुन, मैं तुझे चिता देता हूँ! 9तेरे बीच में पराया ईश्वर न हो; 10तेरा परमेश्वर यहोवा मैं हूँ, अपना मुँह पसार, मैं उसे भर दूँगा। 81:10 अपना मुँह पसार, मैं उसे भर दूँगा: अर्थात्, मैं तेरी सब आवश्यकताओं को बहुतायत से पूरी करूँगा (भज. 37:3,4) 11“परन्तु मेरी प्रजा ने मेरी न सुनी; 12इसलिए मैंने उसको उसके मन के हठ पर छोड़ दिया, (प्रेरि. 14:16) 13यदि मेरी प्रजा मेरी सुने, 14तो मैं क्षण भर में उनके शत्रुओं को दबाऊँ, 15यहोवा के बैरी उसके आगे भय में दण्डवत् करें! 16मैं उनको उत्तम से उत्तम गेहूँ खिलाता,