Izajasza 46
1बाबेल की मूर्ति बेल और नेबो देवता झुक गए हैं; 2वे दोनों देवता ही झुक गए हैं; 3“हे याकोब के घराने, मेरी सुनो, 4तुम्हारे बुढ़ापे तक भी मैं ऐसा ही रहूंगा, 5“तुम मेरी उपमा किससे दोगे तथा मुझे किसके समान बताओगे, 6वे जो अपनी थैली से सोना 7वे इस मूर्ति को अपने कंधे पर लेकर जाते हैं; 8“यह स्मरण रखकर दृढ़ बने रहो, 9उन बातों को याद रखो, जो बहुत पहले हो चुकी हैं; 10मैं अंत की बातें पहले से ही बताता आया हूं, 11मैं पूर्व दिशा से उकाब को; 12हे कठोर मनवालो, 13मैं अपनी धार्मिकता को पास ला रहा हूं,