HCV Izajasza Rozdział 27

Izajasza 27

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1स दिन, 2उस दिन— 3मैं, याहवेह इसका रक्षक हूं; 4मैं कठोर नहीं हूं. 5या मेरे साथ मिलकर मेरी शरण में 6उस दिन याकोब अपनी जड़ मजबूत करेगा, 7क्या याहवेह ने उन पर वैसा ही आक्रमण किया है, 8जब तूने उसे निकाला तब सोच समझकर उसे दुःख दिया, 9जब याकोब वेदियों के पत्थरों को चूर-चूर कर देगा, 10क्योंकि नगर निर्जन हो गया है, 11जब इसकी शाखाएं सूख जाएंगी, 12उस दिन याहवेह फरात नदी से मिस्र की घाटी तक अपने अनाज को झाड़ेंगे और इस्राएल, तुम्हें एक-एक करके एकत्र किया जाएगा. 13उस दिन नरसिंगा फूंका जाएगा. वे जो अश्शूर देश में नष्ट किए गए थे और वे जो मिस्र देश में तितर-बितर कर दिए गए थे, वे सब आएंगे और येरूशलेम में पवित्र पर्वत पर याहवेह की आराधना करेंगे.

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