Psalmen 92
1क्या ही भला है, ख़ुदावन्द का शुक्र करना, 2सुबह को तेरी शफ़क़त का इज़्हार करना, 3दस तार वाले साज़ और बर्बत पर, 4क्यूँकि, ऐ ख़ुदावन्द, तूने मुझे अपने काम से ख़ुश किया; 5ऐ ख़ुदावन्द, तेरी कारीगरी कैसी बड़ी हैं। 6हैवान ख़सलत नहीं जानता 7जब शरीर घास की तरह उगते हैं, 8लेकिन तू ऐ ख़ुदावन्द, हमेशा से हमेशा तक बुलन्द है। 9क्यूँकि देख, ऐ ख़ुदावन्द, तेरे दुश्मन; 10लेकिन तूने मेरे सींग को जंगली साँड के सींग की तरह बलन्द किया है; 11मेरी आँख ने मेरे दुश्मनों को देख लिया, 12सादिक़ खजूर के दरख़्त की तरह सरसब्ज़ होगा। 13जो ख़ुदावन्द के घर में लगाए गए हैं, 14वह बुढ़ापे में भी कामयाब होंगे, 15ताकि वाज़ह करें कि ख़ुदावन्द रास्त है