시편 48
1हमारे ख़ुदा के शहर में, 2उत्तर की जानिब कोह — ए — सिय्यून, 3उसके महलों में ख़ुदा पनाह माना जाता है। 4क्यूँकि देखो, बादशाह इकट्ठे हुए, 5वह देखकर दंग हो गए, 6वहाँ कपकपी ने उनको आ दबाया, 7तू पूरबी हवा से तरसीस के 8लश्करों के ख़ुदावन्द के शहर में, 9ऐ ख़ुदा, तेरी हैकल के अन्दर हम ने 10ऐ ख़ुदा, जैसा तेरा नाम है 11तेरे अहकाम की वजह से:कोह — ए — सिय्यून शादमान हो 12सिय्यून के गिर्द फिरो 13उसकी शहर पनाह को खू़ब देख लो, 14क्यूँकि यही ख़ुदा हमेशा से हमेशा तक हमारा ख़ुदा है;