HCV Salmi Capitolo 139

Salmi 139

HCV · Confronta · Audio

1ाहवेह, आपने मुझे परखा है, 2मैं कब उठता हूं और मैं कब बैठता हूं, यह सब आपको ज्ञात रहता है; 3आप मेरे आने जाने और विश्रान्ति का परीक्षण करते रहते हैं; 4इसके पूर्व कि कोई शब्द मेरी जीभ पर आए, 5आप मुझे आगे-पीछे, चारों ओर से घेरे रहते हैं, 6आपका ज्ञान मेरी परख-शक्ति से सर्वथा परे हैं, 7आपके आत्मा से बचकर मैं कहां जा सकता हूं? 8यदि मैं स्वर्ग तक आरोहण करूं तो आप वहां हैं; 9यदि मैं उषा के पंखों पर बैठ दूर उड़ चला जाऊं, 10वहां भी आपका हाथ मेरी अगुवाई करेगा, 11यदि मैं यह विचार करूं, “निश्चयतः मैं अंधकार में छिप जाऊंगा 12अंधकार भी आपकी दृष्टि के लिए अंधकार नहीं; 13आपने ही मेरे आन्तरिक अंगों की रचना की; 14मैं आपके प्रति कृतज्ञ हूं, क्योंकि आपने मेरी रचना भयानक एवं अद्भुत ढंग से की है; 15मेरा ढांचा उस समय आपके लिए रहस्य नहीं था 16आपकी दृष्टि मेरे विकासोन्मुख भ्रूण पर थी; 17परमेश्वर, मेरे लिए निर्धारित आपकी योजनाएं कितनी अमूल्य हैं! 18यदि मैं उनकी गणना प्रारंभ करूं, 19परमेश्वर, अच्छा होता कि आप दुष्ट की हत्या कर देते! 20ये वे हैं, जो आपके विरुद्ध कुयुक्ति की बातें करते हैं; 21याहवेह, क्या मुझे भी उनसे घृणा नहीं है, जिन्हें आपसे घृणा है? 22उनके प्रति मेरी घृणा अखण्ड है; 23परमेश्वर, परीक्षण करके मेरे हृदय को पहचान लीजिए; 24यह देखिए कि मुझमें कहीं कोई बुरी प्रवृत्ति तो नहीं है,

Limite Giornaliero Raggiunto

Aggiorna il tuo piano per continuare a utilizzare le funzioni AI con limiti giornalieri più elevati.

Confronta tutti i piani →